“kitaben khuli hon ya hon band
padhai last night hi hoti hai
kaise kahoon main o yaara ye
engineering. Aise hoti hai.
ज़रूरी नहीं की हर समय, लबों में भगवन का नाम आये,
वो लमहा भी भक्ति का होता है, जब इंसान इंसान के काम आये।
एक आस, एक एहसास, मेरी सोच और बस तुम,एक सवाल, एक मजाल, तुम्हारा ख़याल और बस तुम,एक बात, एक शाम, तुम्हारा साथ और बस तुम,एक दुआ, एक फ़रियाद, तुम्हारी याद और बस तुम,मेरा जूनून, मेरा सुकून बस तुम और बस तुम
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए,
जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए|
हर विश्वास में विश्वास रहने दो,
जुबान पर मिठास रहने दो,
यही तो अंदाज़ है ज़िन्दगी का,
ना खुद रहो उदास, ना दूसरों को रहने दो…