लफ्जों के बोझ से
थक जाती है जुबाँ
कभी कभी
पता खामोशी
"मज़बूरी" है या
"समझदारी"
एक दुआ मंगाते हैं हम अपने भगवान् से,
चाहते हैं आपकी ख़ुशी पुरे ईमान से,
सब हसरतें पूरी हो आपकी,
और आप मुस्कुराएँ दिलों जान से।
हमसफ़र खूबसूरत नहीं
बल्कि सच्चा होना चाहिए
एक मिनट में ज़िन्दगी नहीं बदलती,
पर एक मिनट सोच कर लिया गया फैसला,
पूरी ज़िन्दगी बदल देता है।
ये सिलसिला क्या यूँ ही चलता रहेगा,
सियासत अपनी चालों से कब तक किसान को छलता रहेगा.