लफ्जों के बोझ से
थक जाती है जुबाँ
कभी कभी
पता खामोशी
"मज़बूरी" है या
"समझदारी"
कोई वादा ना कर, कोई ईरादा ना कर!
ख्वाईशो मे खुद को आधा ना कर!
ये देगी उतना ही, जितना लिख दिया खुदा ने!
इस तकदीर से उम्मीद ज़्यादा ना कर!
अँधेरा चाहे कितना भी घना हो लेकिन
एक छोटा सा दीपक अँधेरे को चीरकर प्रकाश फैला देता है
वैसे ही जीवन में चाहे कितना भी अँधेरा हो जाये
विवेक रूपी प्रकाश अन्धकार को मिटा देता है
घमंड ही नहीं गुरुर है अपने किसान होने का।
बढ़ रही हैं कीमते अनाज की,
पर हो न सकी विदा बेटी किसान की
जिंदगी की परीक्षा
कितनी वफादार है,
🌱🌷🌱🌷
उसका पेपर कभी
लीक नहीं होता....!!✍✍✍
क्या खूब लिखा हैं किसी ने संगत का जरा ध्यान रखना साहब🌱🌷🌱🌷
संगत आपकी ख़राब होगी और बदनाम माँ बाप और संस्कार होंगे . ... ......
|| सुप्रभात ||
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