तेरे रुखसार पर ढले हैं मेरी शाम के किस्से,
खामोशी से माँगी हुई मोहब्बत की दुआ हो तुम
प्यार किया था तो प्यार का अंजाम कहाँ मालूम था,
वफ़ा के बदले मिलेगी बेवफाई कहाँ मालूम था,
सोचा था तैर के पार कर लेंगे प्यार के दरिया को,
पर बीच दरिया मिल जायेगा भंवर कहाँ मालूम था..
वो मुझे भूल गयी है लेकिन उसकी यादें अब भी मुझे रुलाती है जितना भूलना चाहूँ म उन यादों को वो यादें उतनी ही याद आती है।
वो मुझे भूल गयी है लेकिन
उसकी यादें अब भी मुझे रुलाती है
जितना भूलना चाहूँ म उन यादों को
वो यादें उतनी ही याद आती है।
गणेश जी का रूप निराला है,
चेहरा भी कितना भोला-भाला है,
जिसे भी आती है कोई मुसीबत,
उसे इन्ही ने तो संभाला है।