हालचाल पूछने का जमाना गया साहिब,,
आदमी online दिख जाए तो समझ लेना
सब ठीक है..
भगवान हम सबको online रखें.....
इस बारिश के मौसम में अजीब सी कशिश हैना चाहते हुए भी कोई शिदत से याद आता है..
हम तो मुफ्त की सलाह दे कर बर्बाद हो गए;
अब तो आलम ऐसा है की मांगने पर भी खेरात नहीं देते…..
गलती से पंखे का बटन क्या
दब गया...
....पूरा परिवार यूँ देखने लग
गया जैसे मैं कोई आतंकवादी
हूँ ..
कुछ यूँ उतर गए हो मेरी रग-रग में तुम,कि खुद से पहले एहसास तुम्हारा होता है।