आज बड़े दिनों के बाद गीले हाथ पोछने के लिए रुमाल ख़रीदातो पेंट का पिछवाडा बोल पड़ा..'कौन सी गलती हो गयी साहेब हमसे, जो सौतन उठा लाये..'
इस गर्मी का आलम बस ...इतना समझ ले ग़ालिब....कपडे धोते ही सुख जाते है ।और पहनते ही गीले हो जाते है ।।
हमारे माँ – बाप हमको बचपन में शहजादों की तरह पालते हैं..लिहाज़ा…
हमारा ये फ़र्ज़ बनता है,,उनके बुढ़ापे में उनको बादशाहों की तरह रखें!
GST के विरोध मे हड़ताल कर रहे व्यापारियो को पता होना चाहिए की ,फूफा के रूठने से ब्याह नही रूका करते..
Wo Chham chham karke aayi,Main mangal sutra lekar khada tha,Wo Rakhi bandhkar chali gayi.