मेरे हिस्से की ज़मीन बंजर थी, मैं वाकिफ ना थाबे-सबब इलज़ाम मैं देता रहा बरसात को..
Ek khubsurat khwab ho aap,
Dil ko chhu jane wala ehsaas ho aap,
Apko kya de gulab hum
Gulabo me khubsurat gulab ho aap.
बलबुध्धि विद्या देहू मोहि
सुनहु सरस्वती मातु
राम सागर अधम को
आश्रय तूही देदातु!!
“देर रत जब किसी की याद सताए,
ठंडी हवा जब जुल्फों को सहलाये.
कर लो आंखे बंद और सो जाओ क्या पता,
जिसका है ख्याल वो खवाबों में आ जाये.”
कुछ अजीब सा रिश्ता है
उसके और मेरे दरमियां
ना नफरत की वजह मिल रही है
ना मोहब्बत का सिला