रहने दो अब के तुम भी मुझे पढ ना सकोगे बरसात में कागज की तरह भीग गया हु..
हाथ में घडी कोई भी हो, लेकिन वक़्त अपना होना चाहिए
पैसे से बिस्तर खरीदा जा सकता है, नींद नहीं
पैसे से महल खरीदा जा सकता है लेकिन खुशियाँ नहीं
अमर वही इंसान होते हैं
जो दुनियां को कुछ देकर जाते हैं
शायरी मे सिमटते कहाँ हैँ दिल के दर्द दोस्तों
बहला रहे हैँ खुद को जरा कागजो के साथ