संता रोटी का एक निवाला खुद खा रहा था और एक पास बैठी मुर्गी को खिला रहा था…बंता :- “ ये क्या कर रहा है ? ”संता :- “ चिकन के साथ रोटी खा रहा हूँ ”
Tujh Se Nahi Waqt Se Naraz Hu Main
Jo Kabhi Tumko Mere Liye Nahi Milta…!!!
चिराग कोई जलाओ की हो वजूद का एहसास,
इन अँधेरों में मेरा साया भी छोड़ गया मुझको !!!
Ummidon ki manzil de gayi,Khwabon ki duniya be gayi,Abe teri kya izzat reh gayi,Jab ek zakkas item tere ko RAKHI pehna gayi...
परेशानी का कोई पैमाना नही होता"साहब"..कुछ लोग तो यही सोचकर परेशान रहते हैये सामने वाला दिनभर मोबाइल में करता क्या है!