लिपट जाओ एक बार फिर गले हमारे,
कोई दीवार न रहे बीच हमारे तुम्हारे,
लिपट जाती जरूर अगर ज़माने का दर न होता,
बसा लेती मैं तुमको अगर सीने में कोई घर होता..
कल्लू पानवाले और मुहल्ले की कमला का चक्कर चल रहा था।
अब एक दिन कमला के पिताजी पानवाले की दुकान पहुंच गए और बोले:
कमलापसंद है ?
कल्लू नीचे उतरा।
पिताजी के पैर छूकर बोला: जी मुझे कमला पसंद है और कमला भी मुझे पसंद करती है।
बस फिर क्या, बवाल हो गया
दे चप्पल.... दे चप्पल.... दे चप्पल....
जिंदगी में तपिश कितनी भी हो कभी हताश मत होना
क्योंकि धूप कितनी भी तेज हो समंदर कभी सूखा नहीं करते
आप को देख कर यह निगाह रुक जाएगी
खामोशी अब हर बात कह जाएगी
पढ़ लो इन आँखों में अपनी मोहब्बत
कसम से सारी कायनात इसे सुनने को थम जाएगी