ज़िक्र और
फ़िक्र करना छोड़ दो,
समझदार होगा तो आएगा
वरना भाड़ में जाएगा !!
वो हमारा जिक्र करें या ना करें
हमें उनकी फिक्र हमेशा रहती है
ज़िक्र करते है तेरा हवाओं से अब
ये तूफ़ान बनके तेरे शहर से गुज़रे तो माफ़ करना
कहीं अब मुलाक़ात हो जाए हमसे,बचा कर के नज़र गुज़र जाइएगा...जो कोई कर जाए कभी ज़िक्र मेरा,हंसकर फिर सारे इल्ज़ाम मुझे दे जाइएगा🤐...।।।
जो सामने जिक्र नही करते,वो दिल ही दिल मे बहुत फिक्र करते हैं.
फ़िक्र तो तेरी आज भी है,बस जिक्र का हक नही रहा