मुझे शिकवा नहीं
तेरे एक भी अल्फ़ाज़ का।
माफ़ कर दे ये उम्मीद है
इतना तो हक है, इस दोस्त का।
I am really very sorry
कितने वक़्त को हमने
मिलके हसीन बनाया था।
टूटे ख्वाबों को भी
मिलके सजाया था।
उन्हीं का वास्ता, मान जाओ
गुस्सा छोड़ दो और लौट आओ।
मिलने को जिससे आंखे तरसती है
पलकें जिसके लिए रोज सजती है।
वो शक्स ही मुझसे रूठा बैठा है
बाहें रोज जिसका इंतजार करती हैं।
यूँ न रहो तुम हमसे खफा,
माफ कर दो हमको जरा,
गलती किये है मानते है हम,
उस गलती की न दो ऐसी सजा !
बहुत उदास है कोई तेरे चुप हो जाने से,
हो सके तो बात कर लो किसी ना किसी बहाने से।
माफ कर दो मैं जब तक जिंदा रहूंगा,
उन बातों के लिए , मैं शर्मिंदा रहूंगा।
Sorry