चलो इस बेफिक्र दुनिया को खुल कर जी लेते है,
सब काम छोड़ो पहले चाय पी लेते है...!
मंजिल तो खैर नहीं मिली,
पर सफर में उसके साथ चाय अच्छी मिली…!
मैं पीसती रही इलायची, अदरख, दालचीनी,
पर महक चाय से तेरी यादों की आयी
इन सुनसान सड़कों पर सुहाना सा सफर चाहिए,
हां मुझे चाय जैसा एक हमसफर चाहिए।
मैंने देखा ही नहीं कोई मौसम,
चाहा है तुझे चाय की तरह
ये चाय की मोहब्बत तुम क्या जानो,
हर एक घूँट में एक अलग ही नशा है।