आसानी से टूट जाऊ, वो इंसान थोड़ी ना हु
सबको पसंद आ जाऊ, चाय थोड़ी ना हु |
मैं इश्क, मोहब्बत, जिंदगी कहूंगा
तुम दो कप चाय ले आना
जलाकर कलेजा चाय को बाहों में भरता है,
कुल्ल्ड जैसा इश्क भला कौन करता हैं
चाय कोई शराब नहीं,
ओर ये सेहत के लिए खराब नहीं…!
मेरी जिंदगी कुछ इस कदर मुकम्मल हो जाए,
एक कप चाय तेरे हाथ की बनी मिल जाए।
ये इश्क़ ओर चाय दोनों का अजीब रिस्ता है,
एक को बनाना पड़ता है दूसरे को मनाना |