कैसे रोकूँ जो अश्क़ आँखों से ढल जाते हैं,
दिल के कुछ दर्द हैं आँखों से निकल जाते हैं!
वो कहने लगी नकाब में भी पहचान लेते हो
हजारों के बीच मैंने मुस्करा के कहा तेरी
आँखों से ही शुरू हुआ था इश्क हज़ारों के बीच !!
कभी तो मेरी आंखें
पढ़ लिया करो
इनमे तुम्हारा
इश्क नजर आता है..!
मुस्कुरा के देखा तो कलेजे में चुभ गयी,
खंज़र से भी तेज़ लगती हैं आँखें जनाब की।