आप के ना चाहने का सिलसिला पुराना है,
उस तरफ़ निगाहें हैं इस तरफ़ निशाना है!
अच्छा है आँखों पर पलकों का कफन है,
वरना तो इन आँखों में बहुत कुछ दफन है!
कभी बैठा के सामने पूछेंगे तेरी आँखो से,
किसने सिखाया है इन्हें हर दिल में उतर जाना !
तुम छुपाते जरूर हो मुझसे पर तेरी आंखें बोल देती है
तुम्हारे दिल के सारे राज मेरे सामने खोल देती है !!
"वो नकाब लगा कर खुद को,
इश्क से महफूज समझते रहे ,
नादां इतना भी नहीं समझते कि ,
इश्क चेहरे से नहीं आँखों से शुरू होता है..❗"
मुस्कुरा के देखा तो कलेजे में चुभ गयी,
खंज़र से भी तेज़ लगती हैं आँखें जनाब की।