मेरे सनम आज तबाही होगी,
तेरे इश्क की रुसवाई होगी,,
पेश करूँगा तेरी वफा को इमरोज़,,
आज अरसो में बेवफा की सुनवाई होगी।
सनम के बिना जीना अधूरी सी लगती हैं,
ये जिन्दगी, जिन्दगी नही मजबूरी सी लगती हैं.
सनम के बिना जीना अधूरी सी लगती हैं,ये जिन्दगी, जिन्दगी नही मजबूरी सी लगती हैं.
महफ़िल भी सजी है सनम भी है,हम कंफ्यूज है इश्क करे या शायरी.
ऐ सनम जिसने तुझे चाँद सी सूरत दी है,उस मालिक ने ही मुझे भी मोहब्बत दी है.
काबिलें तारीफ़ है मेरी सनम की अदायें,ना…ना कहना और फिर शरमा कर बाहों में आना.