सनम के बिना जीना अधूरी सी लगती हैं,
ये जिन्दगी, जिन्दगी नही मजबूरी सी लगती हैं.
दो बाते हो सकती है सनम तेरे इनकार की
या दुनिया से तू डरती है.. या कदर नही मेरे प्यार की
महफ़िल भी सजी है सनम भी है,हम कंफ्यूज है इश्क करे या शायरी.
ऐ सनम जिसने तुझे चाँद सी सूरत दी है,उस मालिक ने ही मुझे भी मोहब्बत दी है.
सनम तेरे इश्क़ की चाहत दिल में लिए फिरते हैं,जब सामने आती हो तो कहने से क्यों डरते हैं.
काबिलें तारीफ़ है मेरी सनम की अदायें,ना…ना कहना और फिर शरमा कर बाहों में आना.