खुद हैरान हूँ मैं अपने सब्र का पैमाना देख कर,
तूने कभी याद ना किया, और मैंने कभी इन्तजार नहीं छोड़ा।
सब्र इतना रखो कि इश्क़ बेहूदा ना बने,
खुदा महबूब बन जाए पर महबूब खुदा ना बने!