बुलंदी की उड़ान पर हो तो जरा सब्र रखकर हवाओं में उड़ो,
परिंदे बताते है की आसमान में ठिकाने नहीं होते।
फिर हुआ यूँ की, सब्र की ऊँगली पकड़ के
हम इतना चले के रस्ते हैरान रह गये।
खुद हैरान हूँ मैं अपने सब्र का पैमाना देख कर,
तूने कभी याद ना किया, और मैंने कभी इन्तजार नहीं छोड़ा।
ज़िन्दगी के आखरी मुकाम तक दो ही सच्चे हमसफ़र मिले,जो हमेशा मेरे साथ चले एक सब्र.. और दूसरा इम्तेहान।
सब्र बहुत था मेरे पास फिर भी वो,बेसब्र कर गई।
एक इंतजार है जो खतम होने का नाम भी नही ले रहाएक सब्र है मेरा पल पल बिगडता जा रहा है