तेरी नफरत को मैने प्यार समझ कर अपनाया है,
प्यार से ही नफरत खत्म होता है,
तूने ही तो समझाया है !!
दिलों में अगर पली बेजान कोई हसरत न होती,
हम इंसानों को इंसानों से यूँ नफरत न होती.
तेरी नफरत से भी हमने प्यार किया था
मगर तुमने हमे दर्द और जख्म दिया था.
“लेकर के मेरा नाम मुझे कोसती तो है
नफरत में ही सही पर मुझे सोचती तो है”