सारी रौनक देख ली दुनिया की,
मगर जो सकून तेरे पहलू में है माँ वो और कहीं नहीं है।
बुलंदियों के हर निशान को छुआ,
जब मां ने गोद में उठाया तो आसमान को छुआ।
लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक मां है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती
मैं क्यों न लिखूं मेरी माँ पर जिसने मुझें लिखा हैं,
मैंने इस दुनिया में सबसे पहले माँ बोलना ही सीखा हैं।
चीख़ती है चिल्लाती भी है,
रोती भी है बिलखती भी है,
जब मेरी माँ ग़ुस्सा हो जाती है,
तो अपनी आँखों में आँसू लिए चुप-चाप सो जाती है।