बुलंदियों के हर निशान को छुआ,
जब मां ने गोद में उठाया तो आसमान को छुआ।
दवा असर ना करे
तो नजर उतारती है,
माँ है जनाब
वो कहाँ हार मानती है |
एक बेवफा को मैंने गले से लगा लिया,
हीरा समझ कर काँच का टुकड़ा उठा लिया,
दुश्मन तो चाहता था मुझको मिटाना मगर,
माँ की दुआओ ने मुझको बचा लिया।
माँ ना होती तो हम ना होते,
माँ के बिना हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते|
में शुक्रगुजार हूँ उस माँ का जिस माँ ने मुझे इस दुनिया में लेकर आने का कष्ट उठाया.
एक हस्ती है जो जान है मेरी,
जो जान से भी बढ़ कर शान हे मेरी,
रब हुक्म दे तो कर दू सजदा उसे,
क्यूँ की वो कोई और नही
माँ है मेरी
घूमी है दुनिया देखे है मंदिर – मस्जिद,मां से तो शुरु धर्म के सारे स्थान भी है,माँ तेरे क़दमों में मेरी जन्नत और मेरा सम्मान भी है।