जरूरत नहीं फिक्र हो तुम,
कहीं कह न पाऊं वो जिक्र हो तुम…!!
मेरे वजूद मे काश तू उतर जाए,
मैं देखु आईना और तू नजर आए !
दर्द क्या होता है बताएगे किसी रोज,
अपने दिल की गजल सुनाएंगे किसी रोज,
उड़ने दो परिंदों को खुली फिजाओं में,
हमारे होंगे तो लौटकर आएंगे किसी रोज…
काश वो मुझे सीने से लगाकर,
मेरी सारी शिकायत दूर कर दे…
मैं सिर्फ उनका हो जाऊं
मुझे वो इतना मजबूर कर दे…..
वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो…
आँखों में ख़्वाब,ओंठो की निशानी छोड़ जाती है,जब भी मिलती है पगली,अनजाने में कोई कहानी छोड़ जाती है l