अपनी कलम से “दिल से दिल” तक की बात करते हो,
सीधे-सीधे कह क्यों नहीं देते हम से प्यार करते हो.
प्यार तो बहुत छोटा लफ्ज़ है,
आप में तो मेरी जान बस्ती है…!!
हकीकत कहो तो उन्हें ख्वाब लगता है,
शिकवा करो तो उन्हें मज़ाक लगता है,
कितनी शिद्दत से हम उन्हें याद करतें हैं,
एक वो हैं जिन्हें ये सबकुछ मजाक लगता है…
काश पहले ही तेरे बिना रहना सीख लिया होता
तो आज जीने में इतनी तकलीफ न होती
हर पल बस फिक्र-सी होती है,
जब मोहब्बत किसी से बेपनाह होती है।
उनके दीदार की तलब दिल में उठे बार-बार है
कैसे कहे उनसे कि हमें उनसे प्यार है