यूँ लगे दोस्त तिरा मुझ से ख़फ़ा हो जाना,
जिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना!
ये दिल जिंदगी से खफा हो चला था,
इसे फिर से जीने के बहाने तुम बने!
ख़फ़ा हो लेते हैं खु़द से ही अक्सर,
हमारा जो़र चलता है हमीं तक!
बराबर ख़फ़ा हों, बराबर मनाएँ,
न तुम बाज़ आओ न हम बाज़ आएँ!