दिल को बड़ा सुकून आता है,
किसी गरीब की सहायता करने,
पर जब वह मुस्कुराता है !
अमीरी का हिसाब तो दिल देख के किजिए साहब,
वर्ना गरीबी तो कपडों से ही झलक जाती है !
बड़ी बेशरम होती है ये गरीबी,
कमबख्त उमर का भी,
लिहाज नहीं करती !
उन घरों में जहाँ मिटटी के घड़े रहते हैंकद में छोटे मगर लोग बड़े रहते हैं
जरा सी आहट पर जाग जाता है वो रातो कोऐ खुदा गरीब को बेटी दे तो दरवाज़ा भी दे
कैसे बनेगा अमीर वो हिसाब का कच्चा भिखारीएक सिक्के के बदले जो बीस-कीमती दुआएं देता है