अक्ल कहती है कि मारा जाएगा…
दिल कहता है कि देखा जाएगा…
हम भी दिल की बात कहाँ कह पाते हैं,
आप भी कुछ कहते कहते रह जाते हैंं!
बात जो दिल में धड़कती है मोहब्बत की तरह,
उस से कहनी भी नहीं उस से छुपानी भी नहीं!
अब उसके साथ रहूँ या फिर उस से किनारा कर लूँ,
जरा ठहर जा ऐ दिल मैं ये फैसला दोबारा कर लूँ।
मानता ही नहीं कमबख्त दिल उसे चाहने से,
मैं हाथ जोड़ता हूँ तो ये गले पड़ जाता है।
कसूर तो था इन निगाहों का
जो चुपके से दीदार कर बैठा
हमने तो खामोश रहने की ठानी थी
पर बेवफा यह जुबान इजहार कर बैठा