अब उसके साथ रहूँ या फिर उस से किनारा कर लूँ,
जरा ठहर जा ऐ दिल मैं ये फैसला दोबारा कर लूँ।
काश की खुदा ने दिल शीशे के बनाये होते,
तोड़ने वाले के हाथों में जख्म तो आए होते।
मानता ही नहीं कमबख्त दिल उसे चाहने से,
मैं हाथ जोड़ता हूँ तो ये गले पड़ जाता है।
दिल से ख्याल-ए-सनम भुलाया न जाएगा,
सीने में दाग है कि मिटाया न जाएगा !
मैं हाथ जोड़ता हूँ तो ये गले पड़ जाता है !
कसूर तो था इन निगाहों का
जो चुपके से दीदार कर बैठा
हमने तो खामोश रहने की ठानी थी
पर बेवफा यह जुबान इजहार कर बैठा