छुपी होती है लफ्जों में बातें दिल की,
लोग शायरी समझ के बस मुस्कुरा देते हैं !
हम भी दिल की बात कहाँ कह पाते हैं,
आप भी कुछ कहते कहते रह जाते हैंं!
बात जो दिल में धड़कती है मोहब्बत की तरह,
उस से कहनी भी नहीं उस से छुपानी भी नहीं!
भूलना भुलाना तो दिमाग का काम है
बेफिक्र रहिए जनाब आप तो दिल में है।
उसकी बस एक झलक ही काफी हैं,
मेरी होंठो की हसी के लिए।
दिखने में वो बहुत गरीब थी साहब पर..
उसकी हँसी किसी शहजादी से कम नहीं थी।