तू चेहरे की बढ़ती सिलवटों की परवाह न कर…
हम लिखेंगे अपनी शायरी में हमेशा जवाँ तुझको!
यूं न रखो चेहरे पर
इतना सादापन,
दिल आवारगी का
बहाना न ढूंढ ले।
खूबसूरत गज़ल जैसा है तेरा चाँद सा चेहरा,
निगाहे शेर पढ़ती हैं तो लब इरशाद करते है !!
छु कर निकलती है जो हवाएँ तेरे चेहरे को
सारे शहर का मौसम गुलाबी हो जाता है
वो अपने चेहरे पे सौ आफ़ताब रखते हैं,
इसलिए तो वो रुख़ पे नक़ाब रखते हैं।
एक चेहरा जो मेरी आंखों में आबाद हो गया,
इतना उसे पढ़ा की मुझे याद हो गया।