तेरे जिस्म से मेरी गुफ़्तगू रही रात भर
कहीं मैं नशे में ज़्यादा बक तो नहीं गया
ये जो इतने प्यार से देखता है तू आजकल
मेरे यार कहीं तू मुझसे थक तो नहीं गया
जब किसी एक को रिहा किया जाए
सब असीरों से मशवरा किया जाए
रह लिया जाए अपने होने पर
अपने मरने पे हौसला किया जाए
इसीलिए तो सबसे ज़्यादा भाती हो
कितने सच्चे दिल से झूठी क़समें खाती हो
मेरे आँसू नही थम रहे कि वो मुझसे जुदा हो गया
और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया
ये दुक्ख अलग है कि उससे मैं दूर हो रहा हूँ
ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है