मेरी आँख से तेरा गम छलक तो नही गया
तुझे ढूंढ कर मैं भटक तो नहीं गया ….!!
ये जो इतने प्यार से देखता है आजकल
मेरे दोस्त तू मुझसे थक तो नहीं गया.!!
तिज़ोरियों पे नज़र और लोग रखते हैं
मैं आसमान चुरा लूंगा जब भी मौका लगा
ये क़ायनात बनाई है एक ताजिर नें
यहां पे दिल नहीं लगना यहां पे पैसा लगा
तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझसे
तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी
डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे
और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
कौन तुम्हारे पास से उठ कर घर जाता है
तुम जिसको छू लेती हो वो मर जाता है
जैसे तुमने वक़्त को हाथ में रोका हो
सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो
अब ज़रूरी तो नही है कि वो सब कुछ कह दे
दिल मे जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है