बहुत खूबसूरत है तेरे इन्तजार का आलम,
बेकरार सी आँखों में इश्क़ बेहिसाब लिए बैठे…
ज़िन्दगी-ए-बेकरार में यूं सुकूँ बन कर आओ…
ज्यूं सर्द मौसम में दरख़्तों से छन कर धूप आती है!
रात भर बेक़रारी की सबब बनी जो सनसनाहट
वो सिर्फ हवा के झोंके थे यादों के आँगन में।
बेक़रारी है कभी, पूरे समन्दर की तरह,
और कभी मिल जाता है बस, एक क़तरे में सुकून.
बेवक्त बेवजह बेसबब सी बेरुखी तेरी
फिर भी बेइंतहा तुझे चाहने की बेबसी मेरी