मुझे मालूम है मैं उसके बिना जी नहीं सकती। उसका भी यही हाल है मगर किसी और के लिए।
“हर बार दिल से ये पैगाम आए,
ज़ुबाँ खोलूं तो तेरा ही नाम आए,
तुम ही क्यूँ भाए दिल को क्या मालूम,
जब नज़रों के सामने हसीन तमाम आए॥”
उफ्फ..! तुम्हारे यह नखरे में पूरी जिंदगी उठाऊंगा..
याद है मुझे मेरी हर एक गलती,
एक तो मोहब्बत कर ली,
दुसरी तुमसे कर ली,
तिसरी बेपनाह कर ली।
महफूज़ हैं तेरे प्यार के नगमे इस दिल में,जब मन करे तो दरवाज़ा खटखटा देना। ??