बहोत अंदर तक जला देती है,वो शिकायतें जो बयाँ नही होती..
Humne to khud se inteqam lia ,
Tumne kya soch kar humse mohabbat ki?
तुम मुझे कभी दिल, कभी आँखों से पुकारो ग़ालिब,
ये होठो का तकलुफ्फ़ तो ज़माने के लिए है|
अपने खिलाफ बाते खामोशी से सुन लो,यकीन मानो वक्त बेहतरीन जवाब देगा।