“जब आप अपनी गलतियों का स्वीकार करते हैं,
तो आप अपनी नयी शुरुआत की ओर बढ़ते हैं।”
मेरे अजीज हो आप,
मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो आप,
हर इच्छा पूरी करने वाले,
खुदा से बढ़कर हो पापा आप।
अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है…
“अहंकार” दूसरों को झुकाकर कर खुश होता है,
“संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!
पापा को अपने आज क्या उपहार दू,
तोहफे दे फूलों के या गुलाबों का हार दू,
हमारी जिंदगी में जो है सबसे प्यारे,
उन पर तो अपनी जिंदगी ही वार दू।
चाहत तुम्हारी - रविवार की तरहहकीकत जिंदगी - सोमवार की तरह...!!