सुनो निकाल के वक्त इस जमाने से,
चलो मिलते हैं किसी बहाने से।।
हमे बेवफा बोलने वाले
आज तू भी सुनले,
जिनकी फितरत ‘बेवफा’
होती है,
उनके साथ कब ‘वफा’ होती है!!
ये ज़िन्दगी तेरी यादो से,
अब नासूर सी चुभती है,
किसे पता था मेरी दोस्त,
ये यादे ताज महल से बड़ी लगती है!
एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद..दूसरा सपना देखने के हौसले को 'ज़िंदगी' कहते हैं..
कमाल तेरे नखरे,
कमाल का तेरा स्टाइल है;
बात करने की तमीज नहीं,
और हाथ में मोबाइल है!!
😄😄😄😄😝😝