होंगी लाखों महफिलें दुनिया में,
मग़र तेरे दीदार जैसा सुकून कहीं और नहीं..
कही से ये फिजा आई
ग़मों की धुप संग लायी
खफा हो गये हम, जुदा हो गये हम....
जब आती है याद तुम्हारी
तो करके आँखें बंद तुम्हे मिस कर लेते हैं
मुलाकात तो रोज़ हो नही पातीइसलिए ख़यालो में ही किस कर लेते हैं…..
धोखा ना देना कि तुझपे ऐतबार बहुत है,
ये दिल तेरी चाहत का तलबगार बहुत है,
तेरी सूरत ना दिखे तो दिखाई कुछ नहीं देता,
हम क्या करें कि तुझसे हमें प्यार बहुत है।
पूछते हैं मुझसे की शायरी लिखते हो क्यों,
लगता है जैसे आईना देखा नहीं कभी।