“जो पानी से नहाएगा वो सिर्फ लिबास बदल सकता है,
लेकिन जो पसीने से नहाएगा वो इतिहास बदल सकता है।”
वर्षों से दहलीज़ पर कड़ी वो मुस्कान है,
जो हमारे कानो में धीरे से कहती है,
“सब अच्छा होगा”
हे ईश्वर… बस एक छोटी सी दुआ है,
जिन लम्हों में, मेरे अपने मुस्कुराते हो…
वो लम्हे कभी ख़त्म न हो…
आकाश से ऊँचा कौन – पिता
धरती से बड़ा कौन – माता
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए,
जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए|