अरे जनाब! कोई किसी का,
खास नहीं होता।
लोग तभी याद करते हैं,
जब टाइम पास नहीं होता।
न जाने क्या मासूमियत है तेरे चेहरे पर …..
तेरे सामने आने से ज़्यादा तुझे छुपकर
देखना अच्छा लगता है …!!!
भरोसा क्या करना गैरों पर,जब गिरना और चलना है अपने ही पैरों पर।
Yaado k jungle me tab tak firta hu
Jab tak pair lahu luhan nahi ho jate..
मिर्ज़ा ग़ालिब:हमें तो अपनों ने लूटागैरो में कहाँ दम थाअपनी कश्ती वहां डूबीजहां पानी कम थाग़ालिब की पत्नी:तुम तो थे ही गधेतुम्हारे भेजे में कहाँ दम थावहां कश्ती लेकर गए ही क्योंजहाँ पानी कम था!!