“दिल की धड़कन रुक सी गई,
सांसें मेरी थम सी गई !
पूछा हमने दिल के डॉक्टर से पता चला,
कि सर्दी के कारण आपकी यादें दिल में जम सी गई।
तेरी साँसों में बिखर जाऊं तो अच्छा है,
बन के रूह तेरे जिस्म मे उतार जाऊं तो अच्छा है,
किसी रात तेरी गोद में सर रख कर सो जाऊं,
उस रात की कभी सुबह ना हो तो अच्छा है
मुझे खामोश राहों मै तेरा साथ चाहिए,तनहा है मेरा हाथ तेरा हाथ चाहिए,जूनून-ई-इश्क को तेरी ही सौगात चाहिए,मुझे जीने के लिए तेरा ही प्यार चाहिए !!
हाथ ज़ख़्मी हुए तो कुछ अपनी ही खता थी…..
लकीरों को मिटाना चाहा किसी को पाने की खातिर….!!
गैर ले महफ़िल में बोसे जाम के
हम रहें यूँ तश्ना-ऐ-लब पैगाम के
खत लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के
इश्क़ ने “ग़ालिब” निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के