हमें तुमसे मिलने के लिये मीलों का नही,
सिर्फ पलकों का फासला तय करना पड़ता है.
उसने कहा चले जाओ
मेरी ज़िन्दगी से,
मेने कहा कौन हो तुम
भाईसाहब!!
बरस रहे बादल आँखे रो रहीतन्हाई हर बात कह रहीजाये तो कहा जायेहर ओर गम की हवा चल रहीबड़ा अजीब मंजर है इश्क कामर चुका मानस मगर साँस चल रही
मैं आप के बारे में सोच रहा था,
और मुझे आश्चर्य हुआ कि आप
कितनी देर तक मेरे ज़हन में थे
तब मुझे एहसास हुआ: जबसे आप
मुझे मिले, आपने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा!!
तुम्हें गुमां है कि मैं जानता नहीं कुछ भी,मुझे ख़बर है कि रस्ता बदल रहे हो तुम।