कुछ बनना ही है
तो समंदर बनो
लोगों के पसीने छूटने चाहिए
खुद की पर्वा किए बिना दिन रात अन्न उपजाता है, सलाम है इस धरती माँ के पुत्र को जिसके कारण हमारा जीवन मुस्काता है।
छत टपकती हैं, .. उसके कच्चे घर की……
फिर भी वो किसान करता हैं दुआ बारिश की..
शिव की भक्ति, शिव की अपार शक्ति मिले,ज़िंदगी भर खुशी की बहार आपके पूरे परिवार को मिले,महादेव की कृपा आपकी ज़िंदगी मे हमेशा बनी रहे,आपको ज़िंदगी के हर प्रयास मे सफलता मिले.सावन के सोमवार की बधाई
परिश्रम की मिशाल हैं, जिस पर कर्जो के निशान हैं,
घर चलाने में खुद को मिटा दिया, और कोई नही वह किसान हैं
ये सिलसिला क्या यूँ ही चलता रहेगा,
सियासत अपनी चालों से कब तक किसान को छलता रहेगा.