अंजाम की परवाह होती तो, हम मोहब्बत करना छोड़ देते,
मोहब्बत में तो जिद्द होती है, और जिद्द के बड़े पक्के हैं हम।
वो कहता था तुम्हारी मुस्कुराहट बहुत हसीन है कहता तो वो ठीक था इसलिए शायद वो अपने साथ मेरी मुस्कुराहट भी ले गया …
वह अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा
तुम्हें गुमां है कि मैं जानता नहीं कुछ भी,मुझे ख़बर है कि रस्ता बदल रहे हो तुम।
लिख रहा हूं मैं अजांम जिसका कल आगाज आयेगा, मेरे लहू का हर एक कतरा इकंलाब लाऐगा ,मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे ,मेरा कि मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा|