याद बहुत आता है मुझे बचपन का ज़मानादादा जी का मुझ को वो रोते-रोते हँसानामालूम है चले गए हो बहुत दूर लेकिन दादा जीहक़ीक़त में ना सही सपनों में तो चले आना
याद बहुत आता है मुझे बचपन का ज़माना
दादा जी का मुझ को वो रोते-रोते हँसाना
मालूम है चले गए हो बहुत दूर लेकिन दादा जी
हक़ीक़त में ना सही सपनों में तो चले आना
एक आस, एक एहसास, मेरी सोच और बस तुम,एक सवाल, एक मजाल, तुम्हारा ख़याल और बस तुम,एक बात, एक शाम, तुम्हारा साथ और बस तुम,एक दुआ, एक फ़रियाद, तुम्हारी याद और बस तुम,मेरा जूनून, मेरा सुकून बस तुम और बस तुम
अगर आप नेक इंसान हो और लोग आपको बुरा कहे तो चलेगा,
क्यूँकि यह इससे कही अच्छा है कि तुम बुरे हो और लोग तुम्हें अच्छा कहे.
किस लोभ से “किसान” आज भी, लेते नही विश्राम हैं,
घनघोर वर्षा में भी करते निरंतर काम हैं
शिक्षा के प्रति प्रत्येक किसान को जागरूक होना चाहिए तभी उनका जीवन बेहतर हो सकता हैं.
परिश्रम की मिशाल हैं, जिस पर कर्जो के निशान हैं,
घर चलाने में खुद को मिटा दिया, और कोई नही वह किसान हैं