याद बहुत आता है मुझे बचपन का ज़मानादादा जी का मुझ को वो रोते-रोते हँसानामालूम है चले गए हो बहुत दूर लेकिन दादा जीहक़ीक़त में ना सही सपनों में तो चले आना
याद बहुत आता है मुझे बचपन का ज़माना
दादा जी का मुझ को वो रोते-रोते हँसाना
मालूम है चले गए हो बहुत दूर लेकिन दादा जी
हक़ीक़त में ना सही सपनों में तो चले आना
सपने तो मेरे थे पर उनको पूरा करने का रास्ता
कोई और दिखाए जा रहा था और वो थे मेरे पापा….
सफलता ना मिले तो घबराना नही,
रुक कर सोचना तो पाओगे की ,
कुछ कदम चलना अभी शेष है।
जिंदजी में इन दो लोगो को बहौत प्यार करो।
एक माँ जो तुम्हे इस दुनिया में लाये
और एक बीवी जो सारी दुनिया छोड़ कर तुम्हारे पास आये
मदद करना सीखिये
फायदे के बगैर
मिलना जुलना सीखिये
मतलब के बगैर
जिन्दगी जीना सीखिये
दिखावे के बगैर
और
मुस्कुराना सीखिये
सेल्फी के बगैर!