Na Mahino Ki Ginati, Na Salo Ka Hisab Hain, Mohabbat Aaj Bhi Tumse Bepanah Aur Behisab Hain.
Na Mahino Ki Ginati, Na Salo Ka Hisab Hain,
Mohabbat Aaj Bhi Tumse Bepanah Aur Behisab Hain.
शायर तो हम
“दिल” से है….
कमबख्त “दिमाग” ने
व्यापारी बना दिया.
नहीं ‘मालूम ‘हसरत है या तू मेरी मोहब्बत है,बस इतना जानता हूं कि मुझको तेरी जरूरत है।
बात वफ़ाओ की होती, तो कभी न हारते,
बात नसीब की थी, कुछ ना कर सके।
एहसान करो तो दुआओ में मेरी मौत मांगना
अब जी भर गया है जिंदगी से !
एक छोटे से सवाल पर
इतनी ख़ामोशी क्यों ….?
बस इतना ही तो पूछा था-
“कभी वफ़ा की किसी से…