ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ,
भस्म से होता जिनका श्रृंगार, मैं उस भोलेनाथ का पुजारी हूँ।
इस दफा तो बारिशें रूकती ही नहीं,
हमने क्या आसूं पिए की मौसम रो पड़े!
रिमझिम तो है मगर सावन गायब है,बच्चे तो हैं मगर बचपन गायब है..!!क्या हो गयी है तासीर ज़माने की यारोंअपने तो हैं मगर अपनापन गायब है !
मज़ा बरसात का चाहो तो इन आँखों में ना बैठोवो बरसो में कभी बरसे, यह बरसो से बरसती है|
Ishq wale ankhon ki baat samajh lete hain,Sapno mein mil jaye to mulaqat samajh lete hain.Rota to asman bhi hain apne Bichde pyar ke liye,Par log use barsat samajh lete hain.