सुनहरे रथ पे होके सवार
सूर्य देव ए हे आपके द्वार,
छठ पर्व की सुभकामनाएँ
मेरी और से करे स्वीकार
--Happy Chhath Puja--
Humne to khud se inteqam lia ,
Tumne kya soch kar humse mohabbat ki?
जिसकी नीति अच्छी होगी,
उसकी हमेशा उन्नत होगी,
“मैं श्रेष्ट हूँ”… यह आत्मविश्वास है,
लेकिन
“सिर्फ मैं ही श्रेष्ट हूँ”…यह अहंकार है।
जिसने अपनी इच्छाओं पर काबू पा लिया,
उस मनुष्य ने जीवन के दुखों पर काबू पा लिया..!!
क्रोध हमेशा मनुष्य को तब आता है
जब वह अपने आप को कमज़ोर और हारा हुआ पाता है