Sard mausam ka maza kitna alag sa hai,
Tanha raat mein intazaar kitna alag sa hain,
Dhund bani naqab, aur chupa lia sitaron ko,
Unki tanhaai ka ab ehsas kitna alag sa hai.
“Alfaaz To Bahut Hain
Mohabbat Bayan Karne Ke Liye..
Par Jo Khamoshi Nahi Samjh
Sakte, Wo Alfaaz Kya Samjhenge..!!
मुश्किलें दिलो के इरादे आज़माएगी
ख्वाबो के परदे निगाहो से हटाएगी
गिरकर तुझे है समभलना
यह ठोकरें ही तुझे चलना सिखाएगी…
रोज तारीख बदलती है,
रोज दिन बदलते हैं…
रोज अपनी उमर भी बदलती है…
रोज समय भी बदलता है…
हमारे नजरिये भी वक्त के साथ बदलते हैं…
बस एक ही चीज है जो नहीं बदलती…
और वो हैं हम खुद और बस ईसी वजह से
हमें लगता है कि अब जमाना बदल गया है!!
मेरी बर्बादी पर तू कोई मलाल ना करना,भूल जाना मेरा ख्याल ना करना,हम तेरी ख़ुशी के लिए कफ़न ओढ़ लेंगे,पर तुम मेरी लाश ले कोई सवाल मत करना!