सार्वजनिक शौचालय में बैठे अकबर को साथ वाले टॉयलेट से आवाज आयी – क्या हाल हैं अकबर ?
अकबर घबराया ..पर फिर बोला – ठीक हूं।
आवाज आयी – क्या कर रहे हो ?
ये बोला – तुम्हारी तरह बैठा हुआ हूं।
आवाज आयी – मैं आ जाऊं अभी तुम्हारे पास?
अकबर बहुत घबराया सा बोला – नहीं ।
आवाज आयी – यार मैं तुमको बाद में कॉल करता हूं…
पता नहीं कौन बदतमीज दूसरे टॉयलेट से मेरी हर बात का जवाब दे रहा है।
वो चैन से बैठे हैं मेरे दिल को मिटा कर
ये भी नहीं अहसास के क्या चीज़ मिटा दी
हे ऊपर वाले मुझे कुछ ज्यादा नहीं चाहियें,
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बस इतना दे दे जितना नीराब मोदी ले कर भागा है
बैंक मैनेजर: ये क्या अजीब सा हस्ताक्षर है?“@/e”संता: ये हस्ताक्षर मेरी दादी के हैं!बैंक मैनेजर: ऐसा अजीब सा हस्ताक्षर? क्या नाम है उनका?संता: जलेबी बाई…
लोगों को पता नहीं कैसे सच्चा
प्यार मिल जाता है...
हमें तो सुबह पलंग के नीचे
उतारी चप्पल नहीं मिलती।
😝😝