रात गुमसुम हैं मगर चाँद खामोश नहीं,कैसे कह दूँ फिर आज मुझे होश नहीं,ऐसे डूबा तेरी आँखों के गहराई में आज,हाथ में जाम हैं,मगर पिने का होश नहीं.
ये सुंदर सी रात है भरपूर तारो की बारात है
हवा बहुत ही गुन गुन है मौसम भी खुब बुल बुल है
इस लवली लवली नाईट मे.
शुभ रात्रि!
नींद चुराने वाले पूछते हैं सोते क्यों नही,इतनी ही फिक्र है तो फिर हमारे होते क्यों नही।
मेरी पलकों का अब नींद से कोई ताल्लुक नही रहा,मेरा कौन है ये सोचने में रात गुज़र जाती है…!!!