जब खामोश आँखो से बात होती है,ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है,तुम्हारे ही ख़यालो में खोए रहते हैं,पता नही कब दिन और कब रात होती है...
जाने उस शख्स को कैसे ये हुनर आता है,रात होती है तो आँखों में उतर आता है,मैं उस के खयालो से बच के कहाँ जाऊं,वो मेरी सोच के हर रस्ते पे नजर आता है !
रात गुमसुम हैं मगर चाँद खामोश नहीं,कैसे कह दूँ फिर आज मुझे होश नहीं,ऐसे डूबा तेरी आँखों के गहराई में आज,हाथ में जाम हैं,मगर पिने का होश नहीं.
सो जाओ सो जाओ
मुझे Good Night कहे बिना सो जाओ
रात की रानी आएगी, धक्का देकर जाएगी
बिस्तर से आपको गिराएगी
फिर सारी नींद उड़ जाएगी